लोकेशन: भीलवाड़ा
रिपोर्टर: प्रदीप वैष्णव
। इसके बावजूद काछोला के राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में व्यवस्थाओं में सुधार होता नजर नहीं आ रहा है। प्रसूति वार्ड में पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में महिलाओं और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं महिला चिकित्सक का पद लंबे समय से रिक्त होने के कारण गंभीर स्थिति में मरीजों को करीब 75 किलोमीटर दूर भीलवाड़ा रेफर करना पड़ता है। देखिए, काछोला से प्रदीप वैष्णव की रिपोर्ट।
भीलवाड़ा जिले के काछोला तहसील क्षेत्र की आठ ग्राम पंचायतों सहित आसपास के सैकड़ों गांव-ढाणियों के लोगों के लिए राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र काछोला प्रमुख चिकित्सा केंद्र है। लेकिन इन दिनों अस्पताल अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है।
प्रसूति वार्ड में पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं होने से प्रसूति महिलाओं और उनके परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रसूति पीड़ा के दौरान अस्पताल पहुंचने वाली महिलाओं के लिए बेड पर गंदे और पुराने चद्दर दिखाई देने की शिकायतें सामने आई हैं। कई बार परिजनों को घर से चद्दर लाकर बेड पर बिछाने और ओढ़ने की व्यवस्था करनी पड़ती है।
अस्पताल परिसर में बेड के नीचे भी गंदगी नजर आने से मरीजों और परिजनों में नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि सफाई के नाम पर हर माह खर्च होने के बावजूद अस्पताल में समुचित सफाई व्यवस्था नजर नहीं आती।
वहीं खैराड़ क्षेत्र के इस प्रमुख सरकारी अस्पताल में महिला चिकित्सक का पद वर्षों से रिक्त है। अस्पताल में चिकित्सकों के चार पद सृजित हैं, लेकिन वर्तमान में केवल एक चिकित्सक, डॉ. रितेश चौधरी, सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में अस्पताल की व्यवस्थाएं नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों के भरोसे चल रही हैं।
काछोला सहित आसपास के गांवों की प्रसूति महिलाओं का प्रसव इसी अस्पताल में कराया जाता है। प्रसव के दौरान जटिलता आने पर महिलाओं को भीलवाड़ा रेफर किया जाता है। जिला मुख्यालय करीब 75 किलोमीटर दूर होने के कारण प्रसूति पीड़ा के दौरान महिलाओं और उनके परिजनों को लंबा सफर तय करना पड़ता है।
डॉ. रितेश चौधरी, चिकित्सा प्रभारी, काछोला ने बताया की
“चिकित्सालय में साफ-सफाई व्यवस्था को लेकर सफाई कर्मियों को निर्देशित कर दिया है। साथ ही अन्य समस्याओं का भी समाधान किया जाएगा।”
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