जिला -प्रतापगढ
तहसील-छोटीसादडी
रिपोर्टर -प्रहलाद जणवा
छोटीसादड़ी। गणपति महोत्सव के आगाज के साथ ही छोटीसादड़ी में एक ऐसा अनूठा गणेश पांडाल लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गया है, जहां पहुंचते ही श्रद्धालुओं को प्रकृति की अनुपम छटा के बीच भगवान गणेश के दर्शन हो रहे हैं। पेड़ों की छाल, लताओं और मिट्टी से तैयार की गई प्राकृतिक गणपति प्रतिमा के साथ यहां दस दिवसीय गणेशोत्सव का शुभारंभ हुआ। श्री राधा-कृष्ण मंदिर, यादव मोहल्ला परिसर में विघ्नहर्ता मित्र मंडल के पर्यावरण प्रेमी युवाओं ने करीब दो माह के अथक प्रयासों के बाद प्राकृतिक स्वरूप में गणपति प्रतिमा तैयार कर स्थापित की। पांडाल को भी इस तरह सजाया गया है कि यहां पहुंचने पर श्रद्धालुओं को मानो घने जंगल के बीच प्रकृति की गोद में पहुंचने का अहसास होता है।
झरने का कल-कल करता पानी और वटवृक्ष की लताओं ने बढ़ाई खूबसूरती ---
पांडाल में पीपल, आम और नीम के पेड़ों की छालों तथा प्राकृतिक पेड़ो की लताओं का उपयोग कर भगवान गणेश की प्रतिमा को आकर्षक स्वरूप दिया गया है। वहीं पांडाल में कल-कल करता झरना, वटवृक्ष की लताएं और घने जंगल का वास्तविक स्वरूप तैयार किया गया है। पूरे परिसर को पर्यावरण के अनुकूल रखते हुए प्रकृति के वास्तविक स्वरूप को उकेरने का प्रयास किया गया है। प्राकृतिक वातावरण के बीच विराजित गणपति की यह प्रतिमा श्रद्धालुओं को आध्यात्मिकता के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रही है। आयोजकों का कहना है कि गणेशोत्सव केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी को समझने का अवसर भी है।
सोशल मीडिया और सिनेमाई कल्पना से अलग साक्षात अनुभव---
प्राकृतिक झरने, घने जंगल, पेड़ों की लताएं और उन्हीं प्राकृतिक संसाधनों से तैयार गणपति प्रतिमा का यह अनूठा संयोजन लोगों को खूब आकर्षित कर रहा है। अब तक जिस तरह के प्राकृतिक दृश्य लोगों ने फिल्मों या कल्पनाओं में देखे थे, उसी तरह का वातावरण छोटीसादड़ी में गणेश पांडाल में साकार किया गया है। प्रतिमा स्थापना के बाद से ही यह पांडाल नगर में चर्चा का विषय बना हुआ है। गणपति के अनूठे स्वरूप के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। युवाओं द्वारा किए गए इस अनूठे प्रयास की नगरवासियों द्वारा सराहना की जा रही है।
Post a Comment