अलवर
पारसी शैली पर आधारित एकमात्र संस्था श्री राजर्षि अभय समाज अलवर द्वारा महाराजा भर्तृहरि का नाटक मंचित किया गया।
नाटक के मंचन में दिखाया गया कि महाराजा भर्तृहरि उज्जैन राज्य का संचालन बहुत ही सुंदर और प्रभावी तरीके से करते हैं। उज्जैन राज्य में कुछ आसुरी शक्तियां अपना प्रभाव दिखाती हैं, जिनका महाराजा भर्तृहरि विनाश करते हैं।
उज्जैन राज्य में बेताल नाम की एक आसुरी शक्ति लोगों में बहुत ज्यादा भय और असुरक्षा की भावना पैदा करती है।
जब उज्जैन के महाराजा भर्तृहरि को इस बारे में पता लगता है तो वह उस आसुरी शक्ति से युद्ध करते हैं और उसका अंत करके अपनी प्रजा को असुरक्षा के वातावरण से मुक्ति दिलाते हैं।
जब भर्तृहरि बेताल का वध कर देते हैं तो उसकी पत्नी बेताली वहां आती है और अपने पति के वध का प्रतिशोध महाराजा भर्तृहरि को मारकर लेना चाहती है लेकिन उसी समय एक युवक वहां आकर उनके प्राणों की रक्षा करता है।
वास्तव में वह युवक कोई और नहीं बल्कि स्वयं उनकी अर्धांगिनी, धर्मपत्नी महारानी पिंगला होती हैं जो अपना वेश बदलकर उनसे मिलने उस भयंकर जंगल में जाती हैं। इस प्रकार महाराजा भर्तृहरि और महारानी पिंगला का विवाह के पश्चात प्रथम बार मिलन दिखाया गया। मिलन के बाद ही महाराजा भर्तृहरि श्रृंगार रस में प्रवेश करते हैं।
उपस्थित दर्शकों ने महाराजा भर्तृहरि व महारानी पिंगल के मिलन दृश्य का बहुत ही आनंद लिया और रोमांचित हुए। पांडाल महाराजा भर्तृहरि की जय से गूंज गया।

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