सिंगरौली के जयंत स्थित शंकर मार्केट का ऐतिहासिक और प्राचीन तालाब... एक ऐसा स्थान जो स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र रहा है। लेकिन आज यही तालाब भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनदेखी का शिकार बनता दिख रहा है।
लाखों रुपये का टेंडर, CSR फंड का पैसा और दावा तालाब के सौंदर्यीकरण का... लेकिन धरातल पर क्या हो रहा है? स्थानिया लोगों का आरोप है कि सौंदर्यीकरण के नाम पर सरकारी पैसे का खुलेआम दुरुपयोग किया जा रहा है। घटिया बालू, नाममात्र की सीमेंट और गुणवत्ताविहीन निर्माण!
यह नजारा है सिंगरौली के जयंत स्थित शंकर मार्केट के प्राचीन तालाब का। सालों से स्थानीय लोग इस तालाब के कायाकल्प का इंतजार कर रहे थे। उम्मीद थी कि CSR (कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) फंड से जब इसका टेंडर पास हुआ है, तो तालाब की सूरत बदलेगी। लेकिन संविदाकार (ठेकेदार) की मनमानी ने ग्रामीणों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि तालाब के सौंदर्यीकरण में जमकर धांधली की जा रही है। निर्माण कार्य में मानक के अनुसार सामग्री का इस्तेमाल नहीं हो रहा। बालू की गुणवत्ता बेहद खराब है और सीमेंट की मात्रा इतनी कम रखी जा रही है कि नई बनी दीवारें भी उखड़ने लगी हैं। लोगों का कहना है कि यह सिर्फ घटिया निर्माण नहीं, बल्कि आस्था के साथ खिलवाड़ और सरकारी खजाने में लाखों का घोटाला है।
"आस्था के केंद्र इस प्राचीन तालाब को एक सुंदर पर्यटक स्थल के रूप में विकसित होना था, लेकिन ठेकेदार और संबंधित जिम्मेदार तंत्र की मिलीभगत से यह योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती दिख रही है। अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन नींद से जागेगा और इस गुणवत्ताविहीन कार्य पर रोक लगाकर जांच बैठाएगा, या फिर CSR फंड का यह पैसा यूं ही घटिया निर्माण की नींव में बह जाएगा?
إرسال تعليق