शर्मनाक! आजादी के दशकों बाद भी गढ़ी साद में श्मशान तक रास्ता नहीं: मृतक की अंतिम यात्रा में कीचड़ में गिरे ग्रामीण, कड़ी मशक्कत के बाद हुआ अंतिम संस्कार

 



संवाददाता-परमसुख सैनी की रिपोर्ट 

लोकेशन- गढ़ी साध भुसावर 

भुसावर (भरतपुर)।

उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत रणधीरगढ़ के गांव गढ़ी साद में विकास के बड़े-बड़े दावों की पोल खोलती एक बेहद हृदयविदारक और दुखद तस्वीर सामने आई है। गांव में मूलभूत सुविधाओं की कमी और रास्तों की खस्ताहाल स्थिति का खामियाजा ग्रामीणों को अपनों के अंतिम संस्कार के समय भी भुगतना पड़ रहा है।

हाल ही में गांव निवासी संपत पुत्र जयकिशन की सड़क दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई थी। इस दुखद हादसे के बाद जब परिजन और ग्रामीण गमगीन माहौल में मृतक की अंतिम यात्रा निकालने लगे, तो श्मशान घाट के रास्ते की बदहाली देखकर सभी हैरान और आहत रह गए।

अंतिम यात्रा के दौरान तमाशा बनी व्यवस्था

श्मशान घाट तक जाने वाले रास्ते पर इस कदर गहरा कीचड़ और पानी भरा हुआ था कि अर्थी को कंधे पर लेकर चलना नामुमकिन सा हो गया था। रास्ते में संतुलन बिगड़ने के कारण शव को ले जा रहे लोग कीचड़ में गिर पड़े। इस दुखद पल में भी ग्रामीणों को घुटनों तक भरे पानी और कीचड़ के बीच भारी मशक्कत करनी पड़ी। काफी संघर्ष के बाद किसी तरह ग्रामीण शव को श्मशान घाट तक पहुँचा सके, तब जाकर अंतिम संस्कार संपन्न हो सका।

पूरे गांव में रास्तों का बना बुरा हाल

ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या केवल श्मशान के रास्ते तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे गढ़ी साद गांव में रास्तों की यही दुर्दशा है। थोड़ी सी बारिश होते ही रास्ते तालाब का रूप ले लेते हैं और जलभराव के कारण ग्रामीणों का पैदल निकलना भी दूभर हो जाता है।

ग्रामीणों ने जताई नाराजगी, पक्के रास्ते की मांग

इस घटना के बाद से पूरे गांव में प्रशासन और स्थानीय प्रतिनिधियों की अनदेखी को लेकर भारी रोष है। ग्रामीणों ने उपखंड प्रशासन व जिला प्रशासन से मांग की है कि ग्राम पंचायत रणधीरगढ़ के गढ़ी साद गांव में श्मशान घाट के रास्ते सहित गांव के मुख्य मार्गों का जल्द से जल्द पक्की सड़क के रूप में निर्माण कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को ऐसे अमानवीय दौर से न गुजरना पड़े।

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