चित्तौडगढ
रिपोर्ट प्रवीण दवे
रमेश कच्छावा के घर पहुंची चित्तौड़गढ़ वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण समिति की टीम, पहचान हुई तो सामने आया दुर्लभ इंडियन एक ईटिंग स्नेक।
हरनाथपुरा, राशमी। दिनांक 16/08/2026, रविवार
चित्तौड़गढ़ जिले के राशमी तहसील के हरनाथपुरा में रविवार रात्रि को रमेश कच्छावा के घर में एक सांप दिखाई दिया जिससे परिवार में भाई का माहौल हो गया। परिवार ने तत्काल इसकी सूचना चित्तौड़गढ़ वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण समिति के अध्यक्ष मनीष तिवारी को दी। सूचना पर राशमी से समिति सदस्य हरलाल को तुरंत मौके पर भेजा गया। रात्रि को काफी ढूंढने पर भी सांप नजर नहीं आया परंतु सुबह फिर से उसी घर में वही सांप दिखाई दिया। एक बार फिर से टीम के सदस्य हरलाल को मौके पर भेजा गया। हालांकि प्रारंभिक निरीक्षण में सांप की सटीक पहचान स्पष्ट नहीं हो सकी इसलिए चित्तौड़गढ़ से पियूष कांबले एवं रामकुमार साहू के नेतृत्व में एक टीम राशमी के लिए रवाना की गई।
टीम ने मौके पर पहुंचकर सांप का बारीकी से निरीक्षण किया। शरीर के विशिष्ट पैटर्न, सिर की बनावट और अन्य पहचान संबंधी विशेषताओं का अध्ययन करने के बाद सांप की पहचान क्षेत्र के लिए दुर्लभ इंडियन एक ईटिंग स्नेक (Boiga Westermanni) के रूप में हुई।
इंडियन एग ईटिंग स्नेक एक अत्यंत विशिष्ट भोजन प्रणाली वाला विषहीन सांप है जो मुख्य रूप से पक्षियों के अंडों पर निर्भर करता है। इसकी गुप्त जीवनशैली और कम दिखाई देने के कारण यह सांप बहुत ही दुर्लभ प्रजाति में आता है।
उपलब्ध प्रकाशित वैज्ञानिक जानकारी के अनुसार इस प्रजाति का सांप सवाई माधोपुर के भैरोड़ा खुर्द गांव में पाया गया था जो कि लगभग 1 फीट 8 इंच का मृत सांप था। चित्तौड़गढ़ जिले के राशमी में मिला यह सांप 2 फीट (61 सेमी.) का होकर जीवित रूप में राजस्थान में पहला रिकॉर्ड हुआ है।
टीम ने सांप का सुरक्षित ढंग से रेस्क्यू कर उसके शरीर के पैटर्न, सिर की संरचना, स्केल और पहचान संबंधी विशेषताओं की विस्तृत फोटोग्राफी की गई। उपलब्ध GPS जानकारी के अनुसार दस्तावेजीकरण के हेतु इस जीवित सांप का रिकॉर्ड तैयार किया गया।
अपने उपयुक्त आवास में ही किया सुरक्षित रिलीज़
रेस्क्यू के बाद टीम ने साँप को किसी दूरस्थ स्थान पर ले जाने के बजाय उसके उपयुक्त प्राकृतिक आवास को प्राथमिकता दी। चूंकि साँप उसी क्षेत्र में पाया गया था और वहां उसका प्राकृतिक आवास उपयुक्त प्रतीत हुआ, इसलिए आवश्यक पहचान, फोटोग्राफी और दस्तावेजीकरण पूरा करने के बाद उसे उसी क्षेत्र के उपयुक्त नैसर्गिक आवास में सुरक्षित रूप से रिलीज़ कर दिया गया।
चित्तौड़गढ़ वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण समिति के लिए बड़ी उपलब्धि
इस अभियान में चित्तौड़गढ़ वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण समिति के अध्यक्ष मनीष तिवारी के त्वरित समन्वय, हरलाल की मौके पर प्रारंभिक कार्रवाई तथा पीयूष कांबले एवं राम कुमार साहू द्वारा विशेषज्ञ पहचान और डॉक्यूमेंटेशन, की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
श्री पीयूष कांबले, कोषाध्यक्ष, CWECS के अनुसार, “दुर्लभ वन्यजीव का रेस्क्यू केवल उसे सुरक्षित हटाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। उसकी सही पहचान, फोटो, स्थान और अन्य वैज्ञानिक जानकारी भविष्य में क्षेत्र की जैव-विविधता को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।”
एग ईटिंग स्नेक का मध्यपूर्वी राजस्थान के बाद चित्तौड़गढ़ में जीवित प्रमाण का मिलना इसके विशिष्ट आवासीय क्षेत्र में पाए जाने का संकेत है। इसका प्रथम जीवित प्राणी प्रमाण मिलन दक्षिण पूर्वी राजस्थान का सांपों के उपयुक्त आवासीय विशेषता को दर्शाता है।
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