अलवर
अलवर जिले की सरिस्का अभयारण्य क्षेत्र से सटी तपोभूमि पर जन-जन की आस्था के प्रतीक उज्जैन के महाराज के पद को त्याग कर तपस्वी बने राजऋषि भर्तहरि महाराज का मेला पूजा अर्चना के साथ भाद्र शुक्ल पक्ष छठ से धूमधाम के साथ शुरू हुआ।
वहीं अष्टमी को बाबा का भराभर मेला रहेगा। जहां घर-घर बाबा की ज्योत देखी जाएगी और दाल बाटी चूरमा का भोग लगाकर नाथ संप्रदाय के साधु को भोजन कराया जाएगा
गौरतलब रहे की लोक देवता बाबा भर्तहरि के मेले में राजस्थान के अलावा मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, गुजरात सहित अन्य प्रदेशों से श्रद्धालु आते हैं और बाबा मन्नतें पूरी करते हैं।कहतें है की बाबा भर्तहरी ने अपनी तपस्या से अविरल गंगा को पहाड़ों से प्रादुर्भाव किया जो आज भी अविरल बह रही है।
मेले में प्रमुख रूप से मूसल, रई, मटके, बिलोने, खुरचन, लाठी, बांसुरी तथा बाबा भर्तहरी के नीति एवं वैराग्य शतक की बिक्री हो रही है।
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