गंगरार, 11 सितम्बर। पर्यूषण पर्व के चौथे दिन शुक्रवार को वर्धमान स्थानक भवन में आयोजित नियमित प्रवचन के दौरान धर्मसभा में तप की महिमा का गुणगान किया गया। स्वाध्यायी राजेश कुमार बोहरा, बेगूं ने कहा कि “तप जीवन का श्रृंगार है।” उन्होंने बाह्य एवं आंतरिक तप की विस्तृत व्याख्या करते हुए नवकारसी एवं आयंबिल तप के महत्व पर प्रकाश डाला।
स्वाध्यायी बोहरा ने कहा कि तप के माध्यम से मनुष्य के भीतर संचित कर्मों की निर्जरा होती है, जिससे आत्मशक्ति में अभिवृद्धि होती है। तप से इहलोक सुधरने के साथ-साथ परलोक का मार्ग भी प्रशस्त होता है। उन्होंने तप दिवस को ‘चूंदड़ी दिवस’ की संज्ञा देते हुए अपनी काव्य प्रस्तुति के माध्यम से श्रद्धालुओं से तप अंगीकार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा— “तपस्या जीवन और श्रृंगार, यह सारा ज्ञानी फरमावें, तप में भारी चमत्कार, तप करने से कुल चमकेगा, तप में शक्ति अपार।”
धर्मसभा में स्वाध्यायी भगवत सिंह कांवड़िया ने अंतगडदसांग सूत्र के तीसरे अध्याय में वर्णित विभिन्न प्रसंगों की व्याख्या की। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा करुणामय होकर ग्रामीण असहाय की सहायता करने तथा अरिष्टनेमी के साथ हुए संवाद और गज सुकुमार द्वारा दीक्षा ग्रहण कर मोक्षगामी होने के प्रसंगों को विस्तार से समझाया। इस दौरान कुल 41 आत्माओं के बारे में चिंतन प्रस्तुत किया गया तथा दस आत्माओं के जीवन प्रसंगों पर विशेष प्रकाश डाला गया।
जैन समाज एवं महावीर इंटरनेशनल अध्यक्ष कोमल सिंह मोदी ने बताया कि धर्मसभा में दीपिका लोढ़ा एवं अंजलि कोठारी ने “गुरुवर तुझको करते नमन, तेरे द्वारे जो भी आया, प्रभु करना मेरा जतन”, सरिता सुराणा ने “पर्युषण रो पर्व, मन खिल जावे” तथा सुजान मल सुराणा ने “दुनिया दोई मुंडा की” गीत प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
इस अवसर पर दोनों जैन स्वाध्यायी बंधुओं द्वारा जिनवाणी पर आधारित ज्ञानवर्धक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। भगवान आदिनाथ की पूजा-अर्चना के साथ नवकार महामंत्र का जाप किया गया। वहीं महिला श्राविकाओं ने धर्मसभा में एक जैसी चूंदड़ी ओढ़कर सामूहिक रूप से उपवास का संकल्प लिया।
पर्यूषण पर्व के दौरान आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर तप, संयम और आत्मशुद्धि का संदेश आत्मसात किया।
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