चित्तौडगढ
रिपोर्ट - प्रवीण दवे
चित्तौड़गढ़ निकाय चुनाव परिणाम 14 सितंबर को मतगणना, क्या कांग्रेस करेगी वापसी या भाजपा बरकरार रखेगी कब्जा?
चित्तौड़गढ़ ज़िले में भारतीय जनता पार्टी के लिए यह चुनाव महज़ एक स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं, बल्कि साख का वह संग्राम है जिसे हर कीमत पर बरकरार रखने के लिए सत्ता और संगठन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। पार्टी का हर एक रणनीतिकार इस बात को अच्छे से समझता है कि ज़िले के इन सातों निकायों में वर्चस्व बनाए रखना आगामी संदेशों के लिए कितना अनिवार्य है।
विकास की गाथा या जोड़-तोड़ की राजनीति ?
कल सुबह आठ बजे के बाद जब परिणाम सामने आएंगे, तो दो ही रास्ते स्पष्ट होंगे या तो जनता ने किसी एक दल के पक्ष में स्पष्ट जनादेश देकर विकास की नई गाथा लिखने का मार्ग प्रशस्त किया होगा। या फिर त्रिशंकु या मिली-जुली स्थिति के चलते शहर की राजनीति एक बार फिर रिसॉर्ट पॉलिटिक्स, बाड़ेबंदी और जोड़-तोड़ के उस अंधेरे गलियारे में प्रवेश कर जाएगी, जहां सिद्धांतों की बलि चढ़ती है और केवल सौदेबाजी की गूंज सुनाई देती है।
बाबाजी की वह चेतावनी आज हर समझदार मतदाता के मन में कौंध रही है "शहर वासियों ने सही को चुना, तो विकास के नए आयाम रचे जाएंगे, नहीं तो..."
परिणाम बस कुछ घंटों की दूरी पर हैं। तब तक के लिए हर राजनीतिक दल के खेमे की सांसें थमी हुई हैं, और शहर की हवा में बस एक ही अनसुलझा प्रश्न तैर रहा है किसका भाग्य चमकेगा, और किस पर सियासी ग्रहण लगेगा ?
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