80 दिन बाद तिरंगे में लिपटी घर लौटी अलवर के वीर की अस्थियां, अग्निवीर समुद्र सिंह के बलिदान पर उमड़ा जनसैलाब

 ​



अलवर 

अरुणाचल प्रदेश के दिबांग वैली जिले में बादल फटने के बाद आई भीषण बाढ़ में लापता हुए अलवर जिले के केसरपुर गाँव निवासी अग्निवीर समुद्र सिंह गुर्जर की अस्थियां करीब 80 दिन बाद गुरुवार को उनके पैतृक गाँव पहुंचीं। शव की पहचान डीएनए जांच से हुई थी। अब उनकी अस्थियां लेकर सैनिक दल रेल से अलवर पहुंचा और अलवर स्थित ईटाराणा सैन्य छावनी से अग्निवीर की अस्थियों को सेना के वाहन में पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ उनके पैतृक गाँव केसरपुर के लिए रवाना किया गया, जहाँ पूरा क्षेत्र अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई देने उमड़ पड़ा।  

​ईटाराणा सैन्य छावनी से सैन्य सम्मान के साथ निकली श्रद्धांजलि यात्रा में तिरंगे में लिपटे बॉक्स में रखी समुद्र सिंह की अस्थियों को नमन किया गया। इसके बाद उनकी अस्थियां पैतृक गाँव केसरपुर ले जाई गईं। रास्ते और गाँव में लोगों ने भारत माता की जय और वीर जवान अमर रहें के नारे लगाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। अग्निवीर समुद्र सिंह का परिवार करीब 80 दिन तक उनके सुरक्षित लौटने की उम्मीद लगाए बैठा था, लेकिन प्राकृतिक आपदा ने परिवार की खुशियां छीन लीं और 4 नवंबर की रात को उनकी अस्थियां अलवर की ईटाराणा सैन्य छावनी पहुंचीं। इसके बाद 5 नवंबर को सैन्य छावनी में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया और सम्मान के साथ अस्थियों की अंतिम यात्रा निकाली गई। गाँव में बड़ी संख्या में ग्रामीण, युवा और आसपास के लोग अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई देने पहुंचे।  

​

​समुद्र सिंह गुर्जर के दादा पलटू राम भारतीय सेना में हवलदार के पद पर रह चुके हैं दादा को सेवा वर्दी में देखकर समुद्र सिंह ने भी देश कि रक्षा करने का सपना संजोया था वर्ष 2024 में अग्निवीर योजना के तहत उनका भारतीय सेना में चयन हुआ।

जबलपुर में प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उनकी पहली तैनाती अरूणाचल प्रदेश के दिबांग वैली में हुई थी ।                          पिता बदलीराम गुर्जर ने बताया कि 14 अगस्त को अरूणाचल प्रदेश के दिबांग वैली जिले के अनिनि स्थित पशुपानी क्षेत्र में बादल फटने से अचानक भीषण बाढ और भुसखलन हो गया था इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में सेना के सात जवान आ गए थे इनमें से 2 जवानों को सुरक्षित बचा लिया गया जबकि अग्निवीर समुद्र सिंह सहित पांच जवान लापता हो गए थे।                        उन्होंने बताया कि इस घटना के बाद भारतीय सेना और भारत तिब्बत सीमा पुलिस की टीमों ने दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में संयुक्त रूप से खोज अभियान चलाया कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और लगातार चुनौतियों के बीच जवानों की तलाशी की गई करीब 30 दिन बाद समुद्र सिंह का शव बरामद हुआ डीएनए जांच के माध्यम से समुद्र सिंह के शव की पुष्टि की गई वहीं गत 2 नवम्बर को असम  के डिब्रूगढ़ में पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया इसके बाद अस्थिया परिजनों को सौंप दी गई।

0 Comments

Post a Comment

Post a Comment (0)

Previous Post Next Post