कल्पना कीजिए... एक ही कमरे में पहली, दूसरी, तीसरी... आठवीं तक की सभी कक्षाएं एक साथ चल रही हों। कमरे के एक कोने में शिक्षक वर्णमाला पढ़ा रहे हों, दूसरे में गणित के सवाल हल हो रहे
हों, तीसरे में विज्ञान का पाठ चल रहा हो और चौथे में बच्चे परीक्षा की तैयारी कर रहे हों। उसी कमरे में प्रधानाध्यापक का कार्यालय भी हो, पोषाहार का राशन भी रखा हो और कबाड़ का ढेर भी। सुनने में यह किसी व्यंग्य जैसा लगता है, लेकिन गंगरार क्षेत्र के बिंदोलिया राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल की यही सच्चाई है। यह स्थिति किसी प्राकृतिक आपदा की नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही की देन है। शिक्षा विभाग ने जर्जर भवन की मरम्मत के लिए कार्यादेश जारी किया। ठेकेदार आया, दो कमरों और बरामदे की छत तोड़कर चला गया। छह महीने गुजर गए, लेकिन निर्माण दोबारा शुरू नहीं हुआ। परिणाम यह हुआ कि पूरा विद्यालय एक ही कमरे में सिमट
गया। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जिस कमरे में पूरा विद्यालय चल रहा है, वह भी सुरक्षित नहीं है। दीवारों और छत में दरारें साफ दिखाई देती हैं। विद्यालय में 75 विद्यार्थी और छह शिक्षक हैं। अलग-अलग कक्षाओं के लिए अलग कमरे नहीं होने से शिक्षक एक ही समय में अलग-अलग कोनों में पढ़ाने को मजबूर हैं।
नीलम पोरवाल, संस्था प्रधान का कहना है की
छत को ठेकेदार ने ढहा दिया, लेकिन मरम्मत नहीं की । जिससे पास के कमरे भी गिरने की स्थिति में आ गए। वर्तमान में दो कमरों में सभी कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है।
वही मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी गणपतलाल वर्मा,इस सम्बन्ध मे बताया की स्कूल में क्षतिग्रस्त दो कमरों व बरामदों को सुरक्षा की दृष्टि से मरम्मत करानी है। ठेकेदार ने कार्य पूरा नहीं किया।
ठेकेदार को अंतिम नोटिस जारी किया जा चुका है।

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