जिला चित्तौड़गढ़
तहसील निंबाहेड़ा
रिपोर्टर पप्पु देतवाल
निंबाहेड़ा। नगर परिषद निंबाहेड़ा में अपने रसूखदारों को टेंडर देने की परिपाठी लगातार चल रही है इसके चलते कई बार ऑफलाइन टेंडर निकाले जाते हैं जिनकी जानकारी सभी संवेदकों को नहीं मिल पाती और यदि किसी को मिल भी जाती है तो उन्हें निविदा फॉर्म नहीं दीये जाते उन्हें किसी प्रकार से दबाव बनाकर या फिर अन्य तरीके से टालम टोल कर दिया जाता है। अपने चहेतों को टेंडर देने के बारे में हमारे द्वारा पूर्व में प्रकाशन किया जा चुका है जिस पर मोहर लगाता एक मामला हाल ही में सामने आया जिसमें नगर परिषद द्वारा लगभग एक करोड़ की लागत से विभिन्न 13 कार्यों की ऑफलाइन निविदा 19 जून को जारी की गई जिसका प्रकाशन 29 जून को किया एवं लोक उपापन पोर्टल पर 28 जून को अपलोड की गई। इस निविदा के फार्म बेचने की अंतिम तिथि 9 जुलाई थी तथा 9 जुलाई को ही जमा करके 10 जुलाई को खोलना था। जब इस निविदा का प्रसारण 8 जुलाई को सोशल मीडिया पर हुआ तो इसमें भाग लेने के इच्छुक संवेदक 9 जुलाई को नगर परिषद पहुंचे और निविदा फार्म लेना चाहे। कुछ ठेकेदारों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि नगर परिषद में संबंधित कार्यालय के बाबू द्वारा यह बताया कि निविदा की अवधि बढ़ाकर 16 जुलाई कर दी और इसके फॉर्म 15 जुलाई को विक्रय करेंगे। जब वे संवेदक 15 एवं 16 जुलाई को नगर परिषद में उपरोक्त निविदा के फार्म लेने पहुंचे तो वहां पर कोई भी जिम्मेदार कार्मिक उपलब्ध नहीं थे जो निविदा फॉर्म दे सके या उसके बारे में संपूर्ण जानकारी बता सके। निविदा फार्म देने वाले जिम्मेदार कार्मिक कार्यालय में उपस्थित नहीं होने की चर्चा सोशल मीडिया भी पर जोर-शोर से चली थी और संवेदकों ने भरकस प्रयास किया कि उन्हें निविदा फार्म मिल जाए लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं मिला। अब यहां सवाल यह खड़ा होता है कि जब निर्धारित तिथियों पर भी निविदा फार्म देने वाले कोई जिम्मेदार कार्मिक कार्यालय में मौजूद नहीं थे तो फिर उपरोक्त निविदा के लिए फॉर्म किसको कब और कैसे बेच दिए गए हालांकि इसका पूरा विवरण संबंधित शाखा के रिकॉर्ड में मौजूद है लेकिन नगर परिषद द्वारा इसकी जानकारी आसानी से नहीं दी जाएगी। ऐसी स्थिति में यह साफ जाहिर हो रहा है कि रसूखदारों का बेड़ा पार हो गया और अन्य ठेकेदार मुंह ताकते रह गए। बता दें कि नियमों की जानकारी के अभाव में या फिर अन्य कारणों से किसी भी ठेकेदार द्वारा उपरोक्त मामले में प्रथम अपील अधिकारी के समक्ष अपील प्रस्तुत नहीं की। यदि ठेकेदार ऐसे मामलों में अपील अधिकारी के समक्ष अपना पक्ष रखना प्रारंभ कर दे तो हो सकता है आने वाले समय में टेंडरों में मनमर्जी रुक सकती है। फिलहाल अभी यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है की उपरोक्त निविदा खोल दी गई या फिर निरस्त कर दी गई।
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