हजारों अफीम किसान उतरे सड़को पर जिला मुख्यालय पर अफीम किसानों का भारी जनसैलाब देखने को मिला।

 




चित्तौडगढ से प्रवीण दवे की रिपोर्ट 

  चित्तौडगढ:अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर जिले भर के सैकड़ों अफीम किसान लामबंद हुए और कलेक्ट्रेट का घेराव कर जमकर नारेबाजी व प्रदर्शन किया। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन और सरकार ने उनकी जायज मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो वे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।प्रदर्शन की शुरुआत में जिले के कोने-कोने से आए सैकड़ों किसान शहर के कॉलेज ग्राउंड में एकत्र हुए। यहाँ एक संक्षिप्त सभा के बाद किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में विशाल पैदल मार्च निकाला। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए किसान नारेबाजी करते हुए शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरे। पैदल मार्च जैसे ही कलेक्ट्रेट चौराहा पहुँचा, किसानों ने वहाँ पड़ाव डाल दिया और कलेक्ट्रेट का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। किसान आंदोलन के चलते शहर की यातायात व्यवस्था खासी प्रभावित रही। कलेक्ट्रेट चौराहे और आसपास के मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। आमजन को असुविधा से बचाने के लिए पुलिस प्रशासन को शहर के मुख्य मार्गों के यातायात रूट में बदलाव करना पड़ा।

किसान प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों का एक ज्ञापन भी सौंपा। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने मुख्य रूप से डोडा चूरा को कठोर NDPS एक्ट से हटाकर आबकारी अधिनियम के तहत शामिल किया जाए। आबकारी व अफीम नीति के तहत पिछले 8 वर्षों के डोडा चूरा नष्टीकरण की मांग का किसानों ने कड़ा विरोध जताया और इसे व्यावहारिक रूप से अनुचित बताया। किसानों पर दर्ज होने वाले मामलों में धारा 8/29 के दुरुपयोग को रोकने और इसे पूरी तरह समाप्त करने की मांग की गई, ताकि निर्दोष किसानों को झूठे मुकदमों और कानूनी उत्पीड़न का सामना न करना पड़े।

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