सुजाखेड़ा में जोगणिया माताजी मंदिर में गूंजे मैया के जयकारे, क्षेत्र में की खुशहाली और मनोकामना पूर्ति पर सजी भव्य भजन संध्या,रोपे गए कल्पवृक्ष के पौधे ।

 

जिला - चितौड़गढ़ 

तहसील - डूंगला 

खबर लोकेशन - चिकारड़ा 

रिपोर्टर - राजमल सोलंकी 


चिकारड़ा।समीपवर्ती गांव सुजाखेड़ा स्थित प्रसिद्ध एवं आस्था के पावन केंद्र श्री जोगणिया माताजी मंदिर प्रांगण में बीते कल रात एक विशाल एवं संगीतमय भजन संध्या का आयोजन बेहद भव्य और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ। खुले, मनोरम और सुरम्य वातावरण में स्थित माताजी के इस पवित्र धाम में पहुँचते ही श्रद्धालुओं का मन असीम शांति और भक्तिभाव से भर जाता है।यह धार्मिक आयोजन भामाशाह रामलाल जाट द्वारा अपने छोटे बच्चे चेतन जाट की मन्नत पूर्ण होने के उपलक्ष्य में महाप्रसाद व भजन संध्या के रूप में आयोजित किया गया। इस पावन अवसर पर समूचे क्षेत्र की सुख-समृद्धि, खुशहाली और आगामी मौसम में झमाझम बरसात की विशेष प्रार्थना माता रानी के दरबार में की गई।

परिसर में रोपे गए दुर्लभ कल्पवृक्ष के 'नर एवं मादा' जोड़े- 

भजन संध्या के इस शुभ और धार्मिक अवसर पर मंदिर परिसर को पर्यावरण व आध्यात्मिक दृष्टिकोण से और अधिक समृद्ध बनाने हेतु एक बेहद सराहनीय कार्य किया गया। मंदिर प्रांगण में दुर्लभ और देवतुल्य माने जाने वाले कल्पवृक्ष के दो पौधे (नर और मादा का जोड़ा) एक साथ रोपे गए। धार्मिक मान्यताओं में कल्पवृक्ष को मनोकामना पूर्ण करने वाला वृक्ष माना गया है। मंदिर परिसर में इस पावन जोड़े के रोपण से पूरे क्षेत्र में हर्ष का माहौल है।

भजन गायक मनीष सोनी ने बिखेरा सुरों का जादू- 

भजन संध्या में भजन गायकों और कलाकारों की जुगलबंदी ने रातभर समां बांधे रखा। इस कार्यक्रम में सबसे खास आकर्षण चिकारड़ा गांव के उभरते युवा भजन गायक मनीष सोनी रहे। अपने ही क्षेत्र के होनहार कलाकार मनीष सोनी ने जब मंच संभाला तो पूरा पांडाल तालियों और मैया के जयकारों से गूंज उठा। अपनी सुरीली आवाज, भावपूर्ण गायकी और शानदार प्रस्तुति से उन्होंने यह साबित कर दिया कि वे भजन गायकी के क्षेत्र में तेजी से अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं। चिकारड़ा के इस प्रतिभावान युवा गायक की बेहतरीन परफॉर्मेंस की पूरे क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है। 

सुप्रसिद्ध कलाकारों की प्रस्तुतियों पर झूमे श्रद्धालु- 

मंच पर सुप्रसिद्ध भजन गायक राजू शर्मा और पप्पू मेवाड़ी सहित क्षेत्र के अन्य सहयोगी गायक कलाकारों ने भी अपने पारंपरिक व ओजस्वी अंदाज में एक से बढ़कर एक माताजी के भजनों की प्रस्तुतियां दीं। भजनों की धुनों पर कुशल डांसरों (नृत्य कलाकारों) ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियां देकर श्रद्धालुओं को देर रात तक झूमने पर मजबूर कर दिया।

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