चित्तौडगढ से प्रवीण दवे की रिपोर्ट
चित्तौड़गढ़ के समीप माताजी की पांडोली गांव से एक दिल को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। यहां करीब 150 साल पुराने ऐतिहासिक बरगद के पेड़ को काट दिए जाने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। विरोध में पंकज मुरोटिया नाम के एक युवक ने अन्न जल त्यागकर अनशन शुरू कर दिया है।
माताजी की पांडोली में जो हुआ, उसने हर प्रकृति प्रेमी का दिल तोड़ दिया है। गांव की शान कहे जाने वाले करीब डेढ़ सौ साल पुराने बरगद को बेरहमी से काट दिया गया। ग्रामीणों का कहना है, ये सिर्फ एक पेड़ नहीं था। ये उनकी आस्था थी, बुजुर्गों की यादें थीं और आने वाली पीढ़ी की धरोहर थी।
पेड़ कटने के बाद जब जिम्मेदार लोगों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। परिजनों और ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। उनका आरोप है कि प्रशासन इस गंभीर मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है।
इसी अन्याय से दुखी होकर स्थानीय युवक पंकज मुरोटिया ने बड़ा कदम उठाया है। पंकज ने न्याय की मांग को लेकर धरना शुरू कर दिया है और पूरी तरह अन्न जल त्याग दिया है। उनका कहना है कि जब तक दोषियों पर उचित और कानूनी कार्रवाई नहीं होती, तब तक ये अनशन जारी रहेगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि पर्यावरण और लोगों की आस्था को चोट पहुंचाने वाले इस कृत्य पर प्रशासन कब जागेगा। क्या पंकज मुरोटिया के बलिदान के बाद कार्रवाई होगी। पांडोली की जनता इंसाफ का इंतजार कर रही है।
*बाइट:*
1. पंकज मुरोटिया - अनशनकारी
2. ग्रामीण महिला - बरगद से जुड़ी आस्था पर

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