जिला - चितौड़गढ़
तहसील - डूंगला
लोकेशन - चिकारड़ा
रिपोर्टर - राजमल सोलंकी
सांवरिया जी फोरलेन कनेक्टिविटी से सुरक्षित रहेगा चिकारड़ा का भविष्य; 5.5 किमी लंबा बाईपास गाँव को धकेलेगा अंधकार में—2 किमी के 'छोटे बाईपास' की पुरज़ोर माँग
चिकारड़ा ।मंगलवाड़-निम्बाहेड़ा फोरलेन परियोजना के अंतर्गत वर्तमान मुख्य मार्ग पर तकनीकी कारणों से सड़क चौड़ीकरण संभव न होने के चलते सरकार द्वारा बाईपास का निर्णय लिया गया है। परंतु चिकारड़ा में प्रस्तावित रामनगर से सादलखेड़ा तक के 5.5 किमी के अत्यधिक बड़े बाईपास को लेकर स्थानीय ग्रामीणों व व्यापारियों में गहरा रोष व्याप्त है। समस्त क्षेत्रवासी अपने क्षेत्रीय विधायक व सहकारिता मंत्री गौतम दक से निरंतर यह पुरज़ोर गुहार लगा रहे हैं कि वे जनभावनाओं का सम्मान करते हुए इस बड़े बाईपास को छोटा करवाएँ। मंत्री महोदय द्वारा पारदर्शी जाँच हेतु अनुशंसा पत्र लिखने पर जिला कलेक्टर महोदया ने तकनीकी जाँच दल गठित किया है। ग्रामीणों की माँग है कि यह कार्यवाही धरातल पर पूर्ण पारदर्शी हो और केवल 2 किमी का 'छोटा बाईपास' ही स्वीकृत किया जाए।
निःस्वार्थ जनभावना: 90% से अधिक ग्रामीण 'छोटे बाईपास' के पक्ष में
ग्रामवासियों ने स्पष्ट किया कि इस माँग में किसी का कोई निजी स्वार्थ नहीं है; 90% से अधिक नागरिक व व्यापारी केवल गाँव का अस्तित्व बचाना चाहते हैं। अलाइनमेंट चाहे सांवरिया जी मार्ग (पश्चिम) से हो, उत्तर से हो या दक्षिण से—जहाँ भी तकनीकी रूप से सुलभ हो, आबादी के निकट मात्र 2 किमी का 'छोटा बाईपास' ही निकाला जाए।
ग्रामीणों ने पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि पास के 'डोरिया' गाँव में एक ही बार की विनती पर वहाँ के विधायक ने बाईपास निरस्त करवाकर मुख्य मार्ग का चौड़ीकरण स्वीकृत करवा दिया, फिर पिछले 40 वर्षों से सत्ताधारी पार्टी को जिताने वाले चिकारड़ा के ग्रामीणों द्वारा 10-12 बार गुहार लगाने के बाद भी सुनवाई क्यों नहीं हो रही?
यात्रियों की आवाजाही व सांवरिया जी फोरलेन से बनी रहेगी रौनक
ग्रामीणों ने बताया कि चिकारड़ा के बाज़ार की मुख्य रौनक यहाँ से गुजरने वाले यात्रियों व श्रद्धालुओं से ही है। अत्यधिक बड़ा बाईपास यात्रियों को दूर डायवर्ट कर देगा, जिससे गाँव वीरान हो जाएगा। जबकि छोटा बाईपास बनने से यात्रियों को भी सीधी सुविधा मिलेगी और स्थानीय व्यापार भी फलता-फूलता रहेगा। साथ ही, भविष्य में चिकारड़ा से सांवरिया जी धाम तक बनने वाला फोरलेन मार्ग इससे सीधे जुड़ जाएगा, जिससे गाँव की तरक्की व प्रतिष्ठा सदियों तक अक्षुण्ण रहेगी।
किसानों की उपजाऊ भूमि, कुओं व पर्यावरण को भारी नुकसान
5.5 किमी के लंबे अलाइनमेंट से दर्जनों किसानों की उपजाऊ सिंचित भूमि, कुएं व नलकूप नष्ट हो रहे हैं तथा भारी संख्या में पेड़ों की कटाई से पर्यावरण को क्षति पहुँचेगी। वहीं 2 किमी के छोटे बाईपास से किसानों का नुकसान न्यूनतम होगा और सरकारी राजस्व की भी भारी बचत होगी।
व्यापारियों के रोज़गार व गौशाला का संरक्षण
वर्तमान मार्ग किनारे सैकड़ों परिवारों की आजीविका टिकी है। बड़ा बाईपास बनने से यह व्यापार ठप हो जाएगा। साथ ही, मुख्य सड़क किनारे स्थित पारंपरिक गौशाला के सुचारू संचालन, संरक्षण व दानदाताओं के सहयोग को बनाए रखने के लिए भी 'छोटा बाईपास' ही एकमात्र व्यावहारिक समाधान है।
इन्होंने उठाई पुरज़ोर माँग
गाँव के अस्तित्व को बचाने की इस न्यायसंगत माँग को लेकर , सत्यनारायण सोनी, मिट्ठू लाल खटीक, हीरा लाल सुथार, दलीचंद लोहार,दिनेश गायरी, नारायण गायरी, भाना गुर्जर, डालू गायरी, महावीर लोढ़ा सहित सैकड़ों ग्रामीणों व व्यापारियों ने एकजुट होकर शासन-प्रशासन से केवल 'छोटा बाईपास' स्वीकृत करने की पुरज़ोर माँग की है।
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