*खुला आसमान ही श्मशान: मरने के बाद भी सुकून से अंतिम संस्कार नसीब नहीं, आदर्श श्मशान योजना कागजों में*


 जिला चित्तौड़गढ़ 

तहसील निंबाहेड़ा 

रिपोर्टर पप्पु देतवाल 


बिलड़ी  ग्राम पंचायत गरदाना  ग्रामीण अंचल में विकास के तमाम दावों के बीच जमीनी हकीकत बेहद दर्दनाक है। यहां व्यक्ति को जीते जी तो सुविधाएं नहीं मिलती, मरने के बाद भी सुकून से अंतिम संस्कार तक नसीब नहीं हो रहा है।


ताजा मामला ग्राम पंचायत गरदाना के ग्राम *बिलड़ी* का है। यहां आज भी अंतिम संस्कार के लिए कोई व्यवस्थित श्मशान घाट नहीं है। ग्रामीणों को खुले आसमान के नीचे, खेतों के बीच, झाड़ियों में चिता लगाकर दाह संस्कार करना पड़ रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि बारिश के मौसम में गीली लकड़ियों से चिता जल ही नहीं रही है और परिजनों को घंटों मशक्कत करनी पड़ रही है।


इस संबंध में *सामाजिक कार्यकर्ता शंकर लाल मेघवाल, बिलड़ी* ने बताया कि राजस्थान सरकार ने प्रत्येक ग्राम पंचायत में *आदर्श श्मशान (मोक्षधाम)* बनाने की योजना शुरू की थी, जिसके लिए लाखों रुपये का बजट भी आता है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह योजना पूरी तरह फेल है। बिलड़ी में आज तक न तो टीन शेड बना, न चारदीवारी और न ही श्मशान तक पहुंचने का रास्ता है। बरसात में तो स्थिति और भी भयावह हो जाती है।


सामाजिक कार्यकर्ता शंकर लाल मेघवाल ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि इस गंभीर समस्या को संज्ञान में लेकर बिलड़ी गांव में तत्काल सर्वसुविधायुक्त आदर्श मोक्षधाम का निर्माण करवाया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को इस पीड़ादायक स्थिति से न गुजरना पड़े।

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