तहसील निंबाहेड़ा
रिपोर्टर पप्पु देतवाल
*निंबाहेड़ा में 11 सितंबर को वोटिंग, शहर में रातों-रात उमड़ा 'चुनावी विकास'*
*निंबाहेड़ा।* नगर परिषद क्षेत्र में वोटिंग में अब कुछ ही दिन बाकी हैं और इधर शहर में अचानक विकास उमड़ पड़ा है।
जिन गलियों में पांच साल तक कीचड़ और अंधेरा पसरा था, वहां अब रातों-रात डामर बिछ रहा है, सीसी रोड बन रही है और रोड लाइटें टंग रही हैं। विभिन्न कॉलोनियों में जेसीबी और ठेकेदारों की ऐसी भागदौड़ मची है, जैसे चुनाव नहीं, कोई मेला लगना हो।
इस 'चमत्कारी विकास' को देख आम मतदाता हक्का-बक्का है। चौपालों पर एक ही चर्चा है स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह विकास नहीं, सत्ता का खुला दुरुपयोग है। सालों तक जो फाइलें दफ्तरों में धूल खा रही थीं, वो अब आचार संहिता से ठीक पहले फटाफट पास हो रही हैं।
एक बुजुर्ग मतदाता ने तंज कसते हुए कहा, "बरसात में तो इन सड़कों पर चलना मुश्किल था, अब चुनाव आया तो डामर की गंगा बह रही है। वोट निकलते ही यही सड़कें फिर उखड़ जाएंगी।"
शहर के हर नुक्कड़ पर यही सवाल है - अगर काम करना ही था तो 3 वर्ष से राज्य में भाजपा सरकार है 3 साल क्या किया? अब जब जनता हिसाब मांगने वाली है, तब लिपापोती क्यों?
लोग दबी जुबान में यह भी कह रहे हैं कि *निष्पक्ष और स्थाई विकास तो भाजपा के बस की बात ही नहीं।* विकास वही जो बिना चुनाव के हो, चुनाव देखकर किया गया काम तो सिर्फ वोट बटोरने का हथकंडा है।
फिलहाल निंबाहेड़ा की जनता सब देख रही है, सब समझ रही है। डामर की चमक से आंखें चौंधियाने वाली नहीं हैं, इस बार वोट सड़क पर नहीं, नियत पर पड़ेगा।

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