° 'पार्सल होल्ड पर है' जैसे फर्जी मैसेज और लिंक के जरिए साइबर ठग बना रहे शिकार; ₹10-20 के नाम पर खाली कर रहे बैंक खाते
° एपीके फाइल्स और फिशिंग लिंक डाउनलोड करने से बचें; संदिग्ध गतिविधि की तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर करें शिकायत
जयपुर 01 अक्टूबर। महानिदेशक पुलिस राजस्थान श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा (R4C) ने राज्य में तेजी से फैल रहे एक नए साइबर अपराध को लेकर आमजन को सतर्क किया है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम श्री वीके सिंह ने बताया कि वर्तमान में साइबर अपराधी इंडिया पोस्ट, स्पीड पोस्ट या प्रमुख कूरियर एजेंसियों के नाम पर आम नागरिकों को एसएमएस, व्हाट्सएप, ईमेल और कॉल के जरिए फर्जी संदेश भेज रहे हैं। इन संदेशों में दावा किया जाता है कि गलत पते के कारण पार्सल (जैसे सरकारी दस्तावेज या कीमती सामान) रोक दिया गया है और इसे वापस लौटने से बचाने के लिए तुरंत दिए गए लिंक पर क्लिक कर एड्रेस अपडेट करें।
साइबर ठगों का 'मोडस ऑपरेंडी'
~ फिशिंग लिंक व एपीके फाइल का इस्तेमाल: साइबर ठग संदेशों के साथ असली जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइट्स या खतरनाक एपीके फाइल्स के लिंक भेजते हैं। लिंक पर क्लिक करते ही एपीके फाइल मोबाइल में इंस्टॉल हो जाती है, जिससे फोन का पूरा कंट्रोल और एक्सेस ठगों के पास चला जाता है।
~ छोटी राशि के भुगतान का झांसा: इसके बाद पते में सुधार के नाम पर पीड़ितों से ₹10, ₹25 या ₹50 जैसे मामूली शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करने को कहा जाता है। जैसे ही पीड़ित अपने डेबिट/क्रेडिट कार्ड की जानकारी, नेट बैंकिंग पासवर्ड या यूपीआई पिन दर्ज करता है, साइबर अपराधी खाते से बड़ी रकम उड़ा लेते हैं।
साइबर सुरक्षा हेतु महत्वपूर्ण गाइडलाइंस
■ क्या करें (Do's):
° आधिकारिक वेबसाइट का उपयोग: स्पीड पोस्ट या कूरियर ट्रैक करने के लिए हमेशा आधिकारिक वेबसाइट (www.indiapost.gov.in) का ही उपयोग करें।
° यूआरएल (URL) की जांच: सरकारी वेबसाइटों के अंत में हमेशा .gov.in या .nic.in होता है। यदि लिंक में .com, .org या कोई अन्य संदिग्ध नाम दिखे तो वह फर्जी है।
° कस्टमर केयर से संपर्क: किसी भी संदेह की स्थिति में केवल आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर 1800-266-6868 पर ही संपर्क करें।
° कॉल फॉरवर्डिंग स्टेटस की जांच: समय-समय पर अपने मोबाइल का कॉल फॉरवर्डिंग स्टेटस चेक करते रहें और किसी अज्ञात नंबर से आए संदेशों को ब्लॉक करें।
● क्या न करें (Don'ts):
* गोपनीय जानकारी न शेयर करें: बैंक खाता संख्या, कार्ड डिटेल, सीवीवी, एटीएम पिन या ओटीपी किसी के साथ साझा न करें।
° कोई भुगतान न करें: इंडिया पोस्ट या कूरियर एजेंसियां एड्रेस अपडेट के लिए ऑनलाइन ₹10-20 की मांग कभी नहीं करती हैं।
° अनजान ऐप न करें डाउनलोड: अनजान व्यक्ति के कहने पर एनीडेस्क, टीमव्यूअर जैसे स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप इंस्टॉल न करें।
साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत यहां करें शिकायत
यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है या ऐसी कोई संदिग्ध कोशिश की जाती है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन, साइबर हेल्प लाइन नंबर 1930, साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 / 9257510100 या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
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