G94NEWS. प्रदीप वैष्णव कि रिपोर्ट
डूंगला नगांवली। प्रेमकुमार शर्मा ने बताया कि रक्षाबंधन के दूसरे दिन से लगभग 40 दिन तक आदिवासी भील समुदाय द्वारा गवरी नृत्य शुरू होता है जो मेवाड़ के अंदर गांव गांव मंचन किया जाता है गांव में सुख समृद्धि महामारी से बचाव की कामना से शक्ति से कामना की जाती है
लोक नृत्य गवरी के वरिष्ठ कलाकार उदामाराज पालखेड़ी ने बताया कि गवरी नृत्य शिव शक्ति की आराधना से शुरू होता है जिसमें गवरी दल के कलाकार सवा महिने तक खाट पर नहीं बैठते हैं हरी सब्जी नहीं खाते हैं नशे से दूर रहते हैं ब्रह्मचर्य का पालन किया जाता है
भील समुदाय मां पार्वती को अपनी बहिन बेटी मानता है और पार्वती अपने पीहर पक्ष आती है तो भील समुदाय शक्ति का लाड प्रेम स्नेह अभिनंदन के लिए लोक नृत्य गवरी का मंचन करते हैं
गवरी में पौराणिक कथा और विभिन्न ऐतिहासिक घटनाक्रम का मंचन किया जाता है जिसमें शौर्य पराक्रम पर्यावरण संरक्षण, हास्य व्यंग के माध्यम से मनोरंजन भी होता है
ऐसी मान्यता है कि गांव में एक बार खांडा अवश्य घुमना चाहिए जिससे किसी प्रकार की महामारी या रोग गांव में नहीं फैलता है
भोल्या भूत, कालु कीर, हटिया, कानजी माराज, राजा रानी, बंजारा मीणा की लड़ाई आदि खेलों का मंचन किया गया
बड़ी संख्या में नंगावली के आसपास गांवों से लोग देखने आए
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