साधु मार्गी जैन संघ निकुंभ के तत्वावधान में आचार्य रामलाल जी मा. सा. के आज्ञानुवर्ती निश्चल मुनि जी मा. सा. आदि ठाणा-2 ने मंगलवार को समता भवन में विशाल धर्म सभा को संबोधित किया।

 

जिला चित्तौड़गढ़

बड़ीसादड़ी

रिपोर्ट महेश टांक निकुंभ

 


साधु मार्गी जैन संघ निकुंभ के तत्वावधान में आचार्य रामलाल जी मा. सा. के आज्ञानुवर्ती निश्चल मुनि जी मा. सा. आदि ठाणा-2 ने मंगलवार को समता भवन में विशाल धर्म सभा को संबोधित किया। उन्होंने उपस्थित श्रावकों को प्रवचन प्रदान करते हुए मन की चंचलता एवं गति के बारे में विस्तार से बताया।


मुनि श्री ने कहा कि मन का स्वभाव पानी की तरह होता है, जो हमेशा ढलान की ओर बहता है। उन्होंने समझाया कि मन की चाल को समझना अत्यंत कठिन है और जीवन में साधना भी उतनी ही कठिन है जितनी मन की गति को समझना। संसार में मन हमेशा आकर्षण की ओर भागता है।


निश्चल मुनि ने आगे कहा कि जब व्यक्ति का मन मलिन होता है और उसमें तृष्णा जागती है, तभी वह ईश्वर भक्ति से दूर हो जाता है। उन्होंने बताया कि जब तक मनुष्य की भीतर की आंख बंद है, तब तक ईश्वर को पाना बहुत कठिन है।


अपने प्रवचन में उन्होंने भक्त रैदास के जीवन का उदाहरण देते हुए सच्ची भक्ति का मार्ग स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि अतीत का विवेक रखने वाला इंसान मन को जीतकर ईश्वर भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ सकता है।


मुनि श्री ने उल्लेख किया कि मनुष्य के अंतर्मन में कई चक्र चलते रहते हैं। मुख में राम का नाम होने के बावजूद, क्रोध, अहंकार, लोभ और माया जैसे आवरण उसे भक्ति मार्ग से विचलित कर देते हैं। इसलिए, उचित-अनुचित को समझकर जीवन में आत्मज्ञान की ओर बढ़ने में मन का बहुत बड़ा योगदान रहता है। उन्होंने श्रावकों से मन को साफ-सुथरा रखकर सदैव ईश्वर भक्ति की ओर प्रेरित होने का आह्वान किया।


इस अवसर पर साधु मार्गी जैन संघ के अध्यक्ष महावीर कुमार मेहता ने श्रावकों को चातुर्मास व्यवस्था के बारे में जानकारी दी। नियमित श्रावकों के साथ श्री राम सत्संग सेवा परिषद के अध्यक्ष प्रेम सिंह सिसोदिया भी उपस्थित रहे। मंत्री सुरेश कुमार सहलोत ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

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